RSS

बाबा की मुरली डीसेम्बर २०११

27 Dec

प्रिय मित्रो,
इस ब्लोग मे मै आपके साथ ब्रह्मा बाबा की अपने बच्चोको मनुष्य से देवता बनाने के लीए जो पढाइ रोज पढाते है ,इसके कुछ अंश यहां आप सबके साथ शेर करुंगा !
ता.१२-१२-२०११, सोमवार,
मीठे बच्चे,
               तुम आधा कल्प के लिए सुखधाम में  Holiday मनायेंगे क्योंकि वहां दुःखका निशान नहि है !
प्रश्नः ब्राह्मण बच्चोको बाप ऐसी कौनसी युक्ति बताते है ? जीस युक्तिसे वे अपना जीवन सफल बना सकते है ?
               बाबा कहते है मीठे बच्चे अपना जीवन सफल करना है तो अपना तन मन धन सब इश्वरीय सेवामें लगाओ, follow father, फीर देखना इसके एवजेमें तुमको क्या मीलता है ? आत्मा  Golden बन जायेगी, तन भी सुंदर मीलेगा, धन तो अथाक मील जायेगा.
गीतः आखीर वह दिन आया आज…….
मुरली का सारः मै शिवबाबा का बच्चा हूं ,मुजे भविष्य इकीस जन्मोके लीए पदम पति बनना है ,इस खुशीमे रहना है और सबको खुश करना है, कीसीभी बातकी परवा नहि करनी है!
– एक बापकी अद्वैत मत पर चलकर बेहदका वैरागी बनना है, एक बापको follow करना है !
वरदानः समर्पणता द्वारा बुध्धिको स्वच्छ बनानेवाले सर्व खजानेसे संपन्न भव !
स्लोगनः एक बाप दुसरा न कोइ इस विधी द्वारा सदा वॄध्धिको प्राप्त करते रहो !
ता.१३-१२-२०११, मंगळ्वार,
मीठे बच्चे,
            सच्चे बापके साथ सच्चे बनो,अगर सच नहि बतलाते तो पाप वृध्धिको पाते जाते हो !
प्रश्नः जब तुम बच्चे कर्मातीत अवस्थाके समीप पहोचेंगे तो कौनसी अनुभूति करेगें ?
        ऐसा अनुभव होगा जैसे माया के तुफान सब समाप्त हो गये है, कीसी भी विध्नमे गबरायेगें नहि, अवस्था बडी नीडर रहेगीं ,जब तक वह अवस्था दुर है तब तक माया के तुफान हैरान करते है ! बाबा कहेते मीठे बच्चे, जीतना तुम रूस्तम बनते हो उतना माया भी रूस्तम हो कर आती है लेकीन तुम्हे विज्य प्राप्त करनी है, डरना नहि है, सच्चे बाप के साथ सच्चाइ,सफाइसे चलते रहो कभी कोइ बात छीपाना नहि !
गीतः जाग सजनीया जाग नवयुग आया की आया…
मुरली का सारः बाप से सदा सच्चा रहेना है, दील तख्तनशीन बनने के लीए श्रीमत्त पर पुरा पुरा चलना है !
– युध्ध के मैदानमे माया के विक्लपो से, विध्नो से डरना नहि है, अपना सच्चा chart रखना है जरमुइ जरमुइ नहि करना है !
वरदानः बाप समान अपने हर बोल वा कर्म का यादगार बनानेवाले दील तख्तनशीन सो राज्य तख्तनशीन भव !
स्लोगनः अपनी उडती कला द्वारा हर समस्या को बीना रूकावट पार करनेवाला ही उडता पंछी है !
ता.१४-१२-२०११, बुधवार
मीठे बच्चे,
               सदा सुखी रहो, जीतना याद करेगें उतना सुख मीलेगा, यही बाप तुम्हे आर्शीवाद देते है !
प्रश्नः संगमयुग पर तुम बच्चे, ऐसा कौनसा शुभ कार्य करते हो जो सारे कल्पमे नहि होता ?
        पवित्र बनना और बनाना यह सबसे शुभ कार्य है, पवित्र बननेसे तुम पवित्र दुनिया के मालिक बन जाते हो, पवित्र बननेकी युक्ति बापने बतायी है की मीठे बच्चे तुम मुजे प्यारसे याद करो, देही अभिमानी बनो ऐसी युक्ति सबको सुनाते रहो !
गीतः किसने यह सब खेल रचाया….
मुरली का सारः शुभ कार्यमे देरी नहि करनी है, पवित्र बन बापसे पुरा वर्सा लेना है ! अपने को लायक बनाकर अप्ने पैरो पर खडा होना है ! एक बाप से पुरा Love रखना है !
– कामकाज करते एक विचित्र बापको याद करना है, कोइ भी व्यर्थ खयालात नहि करने, सत्तोप्रधान बनना है, अपार खुशी में रहना है !
वरदानः साधारणता को समाप्त कर महानता का अनुभव करनेवाले श्रेष्ठ पुरूषार्थी भव !
स्लोगनः मनन की शक्ति द्वारा सागर के तले मे जाने वाले ही रत्नो के अधिकारी बनते है !
१५-१२-२०११, गुरूवार (अव्यक्त मुरली)
सदा फकुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो, तीव्र पुरूषार्थ द्वार सम्पन्न और समान बन साथ चलने की तैयारी करो. 
आज बापदादा बेफिक्र बादशाहों की सभा देख रहे है ! यह सभा इस समय ही लगती है क्योंकी सभी बच्चों ने अपने फिकर बाप को देकर बाप से फखुर ले लीया है !यह सभा अभी ही लगती है ! आप भी हर एक सवेरे से उठ्ते कर्म करते भी बेफिक्र और बादशाह बन चलते हो ना !……..
१६-१२-२०११, शुक्रवार 
मीठे बच्चॅ,
क्रोध भी बहूत बडा कांटा है, इससे बहुतो को दूःख मीलता है, इसलीए इस कांटो को नीकाल सच्चे सच्चे फूल बनो !
प्रश्नः कांटेसे फूल बनने वाले बच्चो को बाप कौनसी आथक (धीरज) देते है ?
        बच्चे अभी तक कांटेसे फूल बनने में जो माया विघ्न डालती है ,यह विघ्न एक दिन खत्म हो जायेगें, तुम स्वर्गमें चले जायेगें, यह कलयुगी कांटे खत्म हो जायेगें ! बापने तुम्हे संगमयुगी pot में डाला है, माया भल मुरजा देती है, लेकीन ज्ञान का बीज अविनाशी है, यह बीज का विनाश नहि हो सकता !
गीतः ना वह हमसे जुदा होगा ना हम उससे जुदा होगें…
मुरली का सारः बहुत बहुत नीडर बन कांटोसे फूल बनानेकी सेवा करनी है, सब मे अविनाशी बिज बोते रहना है !
-क्रोध का बहुत बडा कांटा है, उसे छोड बहुत बहुत प्यारा बनना है, प्यारसे service करनी है, serviceable का    regard रखना है !
वरदानः विश्व परिवर्तन के श्रेष्ट कार्य की जीम्मेवारी निभाते हुए double light रहनेवाले आधारमुरत भव!
-वो आधार मुरत होते है, उनके उपर ही सारी जीम्मेवारी रहेती है. अभी आप जीस रूप से जहां भी कदम उठायेगें  वैसे अनेक आत्माए आपको follow करेगी, यह जीम्मेवारी है लेकीन यह जीम्मेवारी अवस्था को बनाने में बहुत मदद करती है, क्योंकि इससे अनेक आत्माओकी आर्शीवाद मीलती है, जीस कारण जीम्मेवारी हलकी हो जाती है, यह जीम्मेवारी थकान मीटानेवाली है !
स्लोगनः दिल और दीमाग दोनो का balance रख सेवा करनेमें सफलता मीलती है !
१७-१२-२०११, शनिवार 
मीठे बच्चे, 
                आत्म अभिमानी बनने की practice करो, जीतना आत्म अभिमानी बनेगें उतना बापसे love रहेगा !
प्रश्न : देही अभिमानी बच्चो में कौनसा अक्कल सहज ही आ जाता है ?
         अपनो से बडो का  regard कैसे रखे यह अक्क्ल देही अभिमानी बच्चो में आ जाता है, अभिमान तो एकदम मुड्दा बना देता है, बाप को याद ही नहि कर सकते अगर, देहि अभिमानी रहे तो बहुत खुशी रहे धारणा भी अच्छी हो, विकर्म भी विनाश हो, और बडो का regard भी रखे, जो सच्ची दीलवाले है वे समजते है की हम कीतना समय देहि अभिमानी रहकर बापको याद करते है !
गीत : न वह हम से जुदा होंगे न हम उनसे जुदा होंगे….
मुरली का सार : बाप जो राय देते है उसे शिवबाबा की श्रीमत्त समज चलना है ! ज्ञान अमृत पीना और पीलाना है !
-सब को regard देते हुए service पर तत्पर रहनां है ! देह अभिमान छोड देहि अभिमानी रहने की practice करनी है !
वरदान : अपने अव्यक्त शांत स्वरूप द्वारा वातावरण को अव्यकत बनानेवाले साक्षात मुरत भव !
-जैसे सेवाओ के और progamme बनाते हो ऐसे सवेरे से रात तक याद की यात्रा में कैसे और कब रहेगें यह भी programme बनओ और बीच बीच में दो तीन minutes के लीए संकल्पो की traffic को stop कर लो . जब कोइ व्यक्त भाव में ज्यादा दीखाइ दे तो उनको बीना कह अपना अव्यक्त शांत रूप ऐसा धारण करो जो वह भी इशारे से समज जाये, इससे वातावरण अव्यक्त रहेगा अनोखापन दीखाइ देगा और आप साक्षात्कार करानेवाले साक्षात मुरत बन जायेगें !
स्लोगन : संपूर्ण सत्यता ही पवित्रता का आधार है !
२०-१२-२०११, मंगळ्वार
मीठे बच्चे,
               देह अभिमान तुम्हे बहुत दु:खी करतां है, इसलीए देहि अभिमानॅ बनो. देहि अभिमानी बनने से ही पापो का बोजा खतम होगा !
प्रश्न : सतयुग में शाहुकारी का पद कीस आधार पर प्राप्त होता है ?
         शाहुकार बनते है ज्ञान की धारणा के आधार पर, जो जीतना ज्ञान धन धारण करते है और दान करते है उतना वह शाहुकार पद पा लेते है, ever wealthy बनेगें, पढाइ पढनी और पढानी है !बाकी विश्व महाराजन बनने के लीए बहुत royal service करनी है, सब खामिया नीकाल देनी है, पुरा देहि अभिमानी बनना है ! बडे धैर्य और गंभीरता से बाप को याद करना है !
गीत : धीरज धर मनवा तेरे सुख के दिन आये की आये…..
मुरली का सार : 
२३-१२-२०११, शुक्रवार
मीठे बच्चे,
               बाप आये है तुम्हे राजयोग शीखलाने, बापके सीवाय कोइ भी देहधारी तुम्हे राजयोग शीखला नहि सकता!
प्रश्न : तीव्र भक्ति करने से कौनसी प्राप्ती होती है ? कौनसी नहि ?
        कोइ तीव्र भक्ति करते है तो दीदार हो जाता है, बाकी सद्दगति तो कीसीकी होती नहि, वापस कोइ भी जाता नहि, बाप के बीना वापस कोइ भी ले के नहि जाता, तुम इस बने बनाये  drama को जानते हो, तुम्हे आत्मा का यथार्थ ज्ञान है, आत्मा ही स्वर्गवासी और नर्कवासी बनती है !
मुरली का सार : कभी कीसी देहधारी को याद नहि करना है, मेरा तो एक शिवबाबा दुसरा न कोइ, यह पाठ पक्का करना है !
-बाप समान रूहानी पंडा बनकर सबको घर का रास्ता बताना है, अंधो की लाठी बनना है !
वरदान : परतंत्रता के बंधनको समाप्त कर सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव करनेवाले Master सर्व शक्तिमान भव !
-विश्वको सर्व शक्तिओ का दान देने के लीए स्वतंत्र आत्मा बनो, सबसे पहली स्वतंत्रता पुरानी देहके अंदर के सबंध से हो क्योंकि देह की परतंत्रता अनेक बंधनो मे न चाहते हुए भी बांध देती है, परतंत्रता सदैव नीचे की और ले जाती है ! परेशानी वा नीरस स्थिति का अनुभव कराती है, उन्हे कोइ भी सहारा स्पष्ट दीखाइ नहि देता न गमी का अनुभव न खुशी का अनुभव बीच भंवर मे होते है, इसलीए Master सर्व शक्तिमान बन सर्व बंधनो से मुक्त बनो, अपना सच्चा स्वतंत्रता दिवस मनाओ !
स्लोगन : परमात्म मीलन में सर्व प्राप्तीओ की मोज का अनुभव कर संतुष्ट आत्मा बनो !
२४-१२-२०११, शनीवार
मीठे बच्चे,
                देह अभिमान में आने से पाप होते है, इसीलीए देहि अभिमानी बनो ! तुम्हारे manners बहुत अच्छे होने चाहीए, कीसी को भी दुःख नहि देना है !
प्रश्न : इकीस जन्मो की प्रालब्ध बनाने के लीए बाप कौनसी सहज युक्ति बताते है ?
        बच्चे यह इश्वरीय बेंक है, इसमें जीतना जमा करेगें उतना इकीस जन्म प्रालब्ध पायेगें, इश्वरीय स्थापना के कार्य में सफल करने से ही जमा होगा, बाकी तो सब का दीवाला नीकलना ही है ! यह है ही दु:खधाम eartquake होगी,आग लगेगी,सबको घाटा पडना है, इसीलीए कहते है कीनकी दबी रहेगी घुलमें, कीनकी राजा खाय, कीनकी चोर लुट जाये, कीनकी आग जलाये, सफल उनकी हो जो धनी के नाम लगाये !
मुरली का सार : अंदरमे कोइ भी कमी हो तो उसे नीकाल देना है, सच्ची दील रखनी है ! देह अभिमान में आकर कभी क्रोध नहि करना है !
-जब भी फुरसद मीले तो याद की यात्रा में रह कमाइ जमा करनी है !
वरदान : अपने स्वरूप द्वारा भक्तो को light के crown का साक्षात्कार करानेवाले इष्ट्देव भव !
स्लोगन : सदा बापदादा की छत्रछाया के अंदर रहो तो विघ्न विनाशक बन जायेगें !
२५-१२-२०११, रविवार
०६-०२-१९७४ की अव्यक्त मुरली
: परखने की शक्ति से महारथी की परख :
मीठे बच्चे,
                सर्व शक्तिओ को आहवान करे और वह शक्ति आ जाती है क्या ? समाइ हुइ शक्ति को स्वरूप में ला सकते हो क्या , जैसे बाप को व्यक्त मे से अव्यक्त मे लाते हो , क्या सर्व शक्तिया काम में ला सकते हो ? जब परखने की शक्ति काम मे लाओगे तो दुसरी शक्तिया काम मे ला सकेगें ! अष्ट शक्तिया प्रत्यक्ष रूप में दीखाइ देनी चाहीए, ऐसी व्यक्ती ही अष्ट रत्नो में आ सकती है ! महारथी कोइ भी समस्या या परिक्षा आनेवाली है उसे पहले ही catch कर सके. महारथी का पुरूषार्थ भी refind होना चाहीए. महारथी विघ्न आने ही न्हि देंगें. महारथी अर्थात महान पुरूषार्थ करनेवाला जो समस्या को दुर से ही अपने पुरूषार्थ दे हरा देते है ! जो जीतना योग युक्त और युक्ति युक्त होते है वे विध्नो को पहले ही जान जाते है ! सर्वस्व त्यागी माने जीसने विकारो के वंश का भी त्याग कीया है ! सर्वस्व अर्पण करना माना तन,मन ,धन के साथ समय,संबंध और संपर्क सब कु्छ अर्पण करनां ! महारथी का प्रभाव दुर तक  light house की तरह फैलेगा, सुरत से ही पता चलता है !
२०.०२-१९७४ की अव्यक्त मुरली
: सदा सहयोगी एवं सहज योगी बनो :

जैसे बाप की महिमा है ऐसे बाप के काम में सहयोगी है उनकी भी महिमा है ! सदा सहयोगी माना अपना हर काम, हर श्वास बाबा के सहयोग के लीए हो ! स्मृति बनती है संग से और वृती बनती है वातावरण से ! एक घडी का रोब सारे दिन की रूहानीयत को बीगाड देता है ! स्नेह की उत्पती तब होती है जब अपने को आत्मा समजेगें !
वरदान : अपने स्मृति की ज्योती से ब्राह्मण कुळ का नाम रोशन करनेवाले कुलदीपक भव !
स्लोगन : वो सर्व आत्मा के प्रति शुध्ध संकल्प रखते है वही वरदानी मुरत है !
२६-१२-२०११, सोमवार
मीठे बच्चे,
               तुम अभी wonderful रूहानी यात्री हो, तुम्हे इस यात्रा से इकीस जन्मो के लीए नीरोगी बनना है !
प्रश्न : सतयुग में कौन सी चीज काम नहि आती है, जो भक्ति मार्ग में बाप के काम आती है ?
        दिव्य द्ष्ट्री की चावी, सतयुग मे इस चावी की दरकार नहि होती, जब भक्ति मार्ग शुरु होता है तो भक्तो की खुशी के लीए साक्षात्कार कराना पडता है, उस समय यह चावी बाप के काम आती है, इसलीए बाप को दीव्य द्ष्ट्री दाता कहा जाता है ! बाप तुम बच्चो को विश्व की बादशाही देते है, दीव्य दष्ट्री की चावी नहि !
गीत : मरना तेरी गली मे, जीना तेरी गली मे….
मुरली का सार : खुद sensible बनकर दुसरो को भी बनाना है, अपनी चलन बहुत royal और मीठी रखनी है !
– रुहानी यात्रा पर तत्पर रहना है, अपने पांस अच्छी  topic note रखनी है ! एक एक topic पर विचार सागर मंथन करनां है !
वरदान : अतुट  connection द्वारा current का अनुभव करनेवाले सदा मायाजीत विज्यी भव !
स्लोगन : तपस्वी वह है ,जो अच्छे बुरे कर्म करनेवालो के प्रभाव के बंधन से मुक्त है !
२७-१२-२०११, मंगळ्वार
मीठे बच्चे,
               संगम युग की इस अमुल्य घडीयो में श्वासो श्वास बाप को याद करो तुम्हारी एक भी श्वास व्यर्थ न जाये !

प्रश्न : इस समय तुम्हारा मनुष्य जीवन बहुत बहुत valuable है कैसे ?
        इस जीवन में तुम बाप के बच्चे बन बाप से पुरा वरसा लेते हो, इसी मनुष्य तन में पुरुषार्थ कर तुम कोडी से हीरे जैसा बनते हो, bagger से prince और तमोप्रधान से १००% सत्तोप्रधान बनते हो, इसलीए तुम्हे इस समय को व्यर्थ नहि गंवाना है, हर श्वास बाप की याद में रहकर सफल करना है, कर्म करते भी याद में रहना है !
गीत : यह वक्त जा रहा है….
मुरली का सार : अपना तथा दुसरो का जीवन हीरे जैसा बनाने की सेवा करते रहेना है !  Time,money,energy बरबाद नहि करना है !
– दुसरो का कल्याण करने के साथ साथ अपना भी कल्याण करनां है, बुध्धि रुपी जोली में ज्ञान रत्न धारण कर दान भी करना है !
वरदान : एक बाप की स्मृति से सच्चे सुहाग का अनुभव करनेवाले भाग्यवान आत्मा भव !
स्लोगन : अपनी श्रेष्ट स्थिति बनानी है तो अंतर्मुखी बन फीर बाह्यमुखता में आओ !
२८-१२-२०११, बुधवार
मीठे बच्चे,
               तुम अभी स्च्चे सच्चे सत्संग में बैठे हो तुम्हे सच खंड में जाने का मार्ग सत्य बाप बतला रहे है !
प्रश्न : कीस निश्चय के आधार पर पावन बनने की ताकत स्वतः आती है ?
        यदी निश्चय हो की मृत्युलोक में अब हमारा यह अंतिम जन्म है, इस पतित दुनिया का विनाश होना है ,बाप कि श्रीमत है, पावन बनो तो पावन दुनिया के मालिक बनेगें, इस बात के निश्चय से पावन बनने की ताकत स्वतः आती है !
मुरली का सार : हडी सुख का अनुभव करने के लीए बाप जो पढाते है, उसे बुध्धि में धारण करना है ! विचार सागर मंथन करना है !
– इस कब्रीस्तान को देखते भी नहि देखना है,  hear no evil, see no evil, नयी दुनिया के लायक बनना है !
वरदान : इश्वरीय भाग्य में light का crown ,प्राप्त करनेवाले सर्व प्राप्ती स्वरुप भव !
स्लोगन : अपनी रुहानी स्थिति में स्थित रहनेवाले ही मनसा महादानी है !

२९-१२-२०११, गुरुवार
मीठे बच्चे,
               तुम अभी इकीस जन्मो के लीए विश्व के मालीक बनते हो, अभी तुम्हारे पर बृहस्पति की अविनाशी दशा है !
प्रश्न : सच्चे सेवाधारी बच्चो की बुध्धि में कौनसी बात सदैव याद रहेती है ?
        धन दीये धन ना खुटे, वह सदैव दान करते ही रहते है, उनकी बुध्धि में रहता है की हम अपना हि कल्याण करते है ! बाप भी साक्षी होकर देखते है की कौन कौन अपनी जीवन उच्च बनाते है और कौन  pass होंगे ? ज्ञान में manners भी बहुत अच्छे चाहीए ,कभी छोटी छोटी बात में hunk नहि होना चाहीए !
गीत : तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो….
मुरली का सार : इस समय स्वंय को वनवाह में समजना है, अच्छे कपडे अच्छे जेवर पहनने का शोख छोड देना है, सादगी में रह्ते हुए चलन गहुत royal रखनी है !
– छुइ मुइ कभी नहि बनना, मुखसे कडवे बोल नहि बोलने है ! संजीवनी बुटी से मायाजीत बनना है !



वरदान : एक बाप में सारे संसार का अनुभव करनेवाले बेहद के वैरागी भव !
स्लोगन : powerful स्थिति का अनुभव करने के लीए एकांत और रमणीकता का balance रखो !

३०-१२-२०११, शुक्रवार
मीठे बच्चे,
               उच्च पद का आधार पढाइ पर और याद की यात्रा पर है ! इसलीए जीतना चाहो उतना gain up कर लो!
प्रश्न : कौन सा गुह्य राज पहले पहले नहि समजाना है ? क्यों ?
        Drama का जो गुह्य राज है वह पहले पहले नहि समजाना है, क्योंकि कइ मुंज जाते है, कहते है, drama में होगा तो आपे ही राज्य मीलेगा, आपे ही पुरुषार्थ कर लेंगे, ज्ञान के राज को पुरा न समज मतवाले बन जाते है ! यह नहि समजते की पुरुषार्थ बीना तो पानी भी नहि मीलेगा !
गीत : भोलेनाथ से निराला और कोइ नहि…..
मुरली का सार : जैसे ब्रह्मा बाप surrender हुआ ऐसे ,follow father करना है ! अपना सब कुछ इश्वर अर्थ कर trustee बन ममत्व मीटा देना है !
वरदान : मालिकपन की स्मृति द्वारा highest authority का अनुभव करनेवाले combined स्वरुपधारी भव !
स्लोगन : विस्तार को second में समाप्त कर ज्ञान के सार का अनुभव करो और कराओ !    

 
Leave a comment

Posted by on December 27, 2011 in Uncategorized

 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: